Wednesday, November 5, 2008

भिखारी

एक भिखारी आता था मेरे गाँव के पुराने घर मैं.
टूटी चप्पल, मौलाना दाडी, और तुलसी माला लिए कर मैं.
क्या नाम? कौन जात? किसको पता?
भिखारी था, छोटी बिसात......शायद समाज सता.

मां रात की बांसी रोटी, और अमीरन चची कल का साग दे देती थी,
आधी बहार चबूतरे पर बैठ कर खाता,
आधी अपने मैले झोले मैं सहेज कर ले जाता.
मुंह से कभी कुछ नहीं बोला .............
उसकी आँखें झोली भर दुआएं दे देती थीं.
मां रात की बांसी रोटी, और अमीरन चची कल का साग दे देती थी,

आधी रोटी किसको खिलाता है?
इसका अगला पिछला कौन है?
इसकी जुबान क्यूँ इतनी मौन है?
किसकी बंदगी इस कद्र शिद्दत से निभाता है?
आधी रोटी किसको खिलाता है?

एक शाम चुपके से पीछा किया उसका,
जानना था - क्या नाम? कौन मज़हब? कहाँ धाम है उसका?
आखिर आधी रोटी किसको खिलाता है?
किसकी बंदगी इस कद्र शिद्दत से निभाता है?

सर्दी की शाम पड़े,
हम उसके पीछे कोस चले,
मज्जिद गयी, मंदिर गया, अब मेरा चैन भी गया.

तभी एक आवाज़ ने ध्यान खिंचा,
भिखारी की आहत पाकर, खुश होता, कुं कुं आता चितकबरा सफ़ेद कला कुत्ता.
उसके पैरों मैं आकर लोट जाता है.
भिखारी कुत्ते को गोद उठा कर मुस्कराता है,
साथ बिठा कर रोटी खिलाता, मंत्र सिखाता, आयतें सुनाता है,
और कम्बल साथ ओढ़ कर सो जाता है.
इस कुत्ते की बंदगी यह शिद्दत से निभाता है.

पिछली रात गाँव का सौहार्द बिगडा था,
एक और हिन्दू मुस्लमान दंगा भड़का था.
हम ठीक है, अमीरन चची भी साथ है,
जानते हैं दंगों में राजनीती की हाथ है.
लेकिन उस भिखारी का खून हुआ है,
पेट में त्रिशूल और गले पैर गंडासे का घाव मिला है.
साथी ही कुत्ते का खुनसना जिस्म पड़ा है.

अन्नू.

8 comments:

Unknown said...

wah wah
kya baat hai
tu to kavi ho gaya hai
itna to bata waise
tere chhote se dimag me ye vichar aye kaise
khair jahan se bhi aya ye vichar hai
teri kavita sach me zordar hai ;)

Anonymous said...

Good one..... i did not know there was a poet in you... Arvind

सागर नाहर said...

बहुत ही मार्मिक रचना। कविता की तारीफ करूं तो कैसे?
हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है।

॥दस्तक॥
गीतों की महफिल
तकनीकी दस्तक

Prakash Badal said...

शुभकामनाएँ भवनाओं की अभिव्यक्ति जारी रहेँ

गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर said...

bhikhari bhee janta hai hamari sanskiriti, ye dil hai hindustani
narayan narayan

रचना गौड़ ’भारती’ said...

आपका हर्दिक स्वागत है ।
कविता गज़ल के लिए मेरे ब्लोग पर पधारें है ।

अभिषेक मिश्र said...

भावपूर्ण रचना जो हर किसी तक पहुंचनी चाहिए. स्वागत आपका मेरे ब्लॉग पर भी.

Unknown said...

really gr8..dont have words other then this to saay...

really very nice..