दर्द जुते, ग़म पड़े, परेशानियों की खाद है,
क्यूँ जिंदगी नाराज़ है ?
बन रहा, बिगड़ रहा,
हालातों से झगड़ रहा,
पर यह नसीब क्यूँ नाराज़ है?
मौत है, जशन है,
आधा उढा क्यूँ कफन है ??
मौत हो, पूरी हो, जिंदगी से इतनी सी फरियाद है.
साथ हों, पास हों,
ना आइने नाराज़ हों ,
अधुरा सा यह एक ख्वाब है.
अन्नू
