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Kahkashan
Tuesday, December 20, 2016
कवायद
ख़ुशी की कवायद करते कट गयी ज़िन्दगी
अब बाकि है देखना क्या जश्न लाती है मौत ..............?
Saturday, December 17, 2016
उलझनें
ये मुहोब्बत की उलझनें बड़ी बेतरतीब होती हैं,
कभी ज़हन तो कभी मन के करीब होती हैं,
बड़ा मुक़द्दस एहसास है उन रूहानी यादों का;
किस को यद् करें ................?
इन यादों में भी उलझनें नज़दीक होती हैं..
Tuesday, September 27, 2016
धार
बड़े बेबस हैं, नतीजों के दीदार पे,
जाने कौन कह गया की हम में अब वो धार बाकि नहीं....................
Saturday, June 11, 2016
ख्वाब
इस ज़मीं ने उन बादमानों ने,
रात के उजालों में छलकते दर्द के पैमानों ने,
मेरा हँसी ख्वाब ज़ब्त किया है,
उन होश के कद्रदान हुस्न वालों ने.
Saturday, June 4, 2016
रंजिशें
ख्यालों की रंजिशें कुछ ऐसी हैं,
जो दिल में है वो ज़ुबां पर नहीं.
Tuesday, April 26, 2016
वाकिया
एक खुसनसीब सा वाकिया, एक बदनसीब सा ग़म
वहां मुस्कुरा रही थी ज़िंदगी यहाँ तन्हां खड़े थे हम
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