Monday, January 29, 2018

प्रियसी संगिनी

तुम मेरी शक्ति बनना मैं तुम्हारा साहस बनूँगा।
एक दूजे का साथ निभाएँ, सबका मन जीतें और मान बढायें
मैं रूठूँ तो डांट कर मना लेना, तुम रूठो तो छेड़ कर हंसा दूंगा।

तुम मेरा बल बनना मैं तुम्हारा धैर्य बनूँगा।
काँधे पर सहारा दूंगा जब रोना आये तो
बस सर सहला देना जब टूट जाऊ तो।

मेरी स्याह रातों का उजाला बनना, मैं तुम्हारा सहारा बनूँगा
उन ग़म की सांझो को दुपट्टे की हवा से हल्का कर देना,
 मैं तुम्हारे दर्द को इकठ्ठा कर के जज़्ब में सिरा दूंगा।

मेरी परेशानियों का किनारा बनना, मैं तुम्हारी खुशियों का बहाना बनूँगा
एक निवाला तुम खाना, दूजा मैं खिला दूंगा।
अपने एहसासो को तुम्हारी आँखों में पढ़ लूंगा।

बस तुम मेरी शक्ति बनना, मैं तुम्हारा साहस बनूँगा।।

Tuesday, December 20, 2016

कवायद

ख़ुशी की कवायद करते कट गयी ज़िन्दगी
अब बाकि है देखना क्या जश्न लाती है मौत ..............?

Saturday, December 17, 2016

उलझनें

ये मुहोब्बत की उलझनें बड़ी बेतरतीब होती हैं,
कभी ज़हन तो कभी मन के करीब होती हैं,
बड़ा मुक़द्दस एहसास है उन रूहानी यादों का;
किस को यद् करें ................?
इन यादों में भी उलझनें नज़दीक होती हैं..

Tuesday, September 27, 2016

धार

बड़े बेबस हैं, नतीजों के दीदार पे,
जाने कौन कह गया की हम में अब वो धार बाकि नहीं....................

Saturday, June 11, 2016

ख्वाब

इस ज़मीं ने उन बादमानों ने,
रात के उजालों में छलकते दर्द के पैमानों ने,
मेरा हँसी ख्वाब ज़ब्त किया है,
उन होश के कद्रदान हुस्न वालों ने.

Saturday, June 4, 2016

रंजिशें

ख्यालों की रंजिशें कुछ ऐसी हैं,
जो दिल में है वो ज़ुबां पर नहीं. 

Tuesday, April 26, 2016

वाकिया


एक खुसनसीब सा वाकिया, एक बदनसीब सा ग़म 
वहां मुस्कुरा रही थी ज़िंदगी यहाँ तन्हां  खड़े थे हम