Saturday, December 17, 2016

उलझनें

ये मुहोब्बत की उलझनें बड़ी बेतरतीब होती हैं,
कभी ज़हन तो कभी मन के करीब होती हैं,
बड़ा मुक़द्दस एहसास है उन रूहानी यादों का;
किस को यद् करें ................?
इन यादों में भी उलझनें नज़दीक होती हैं..

Tuesday, September 27, 2016

धार

बड़े बेबस हैं, नतीजों के दीदार पे,
जाने कौन कह गया की हम में अब वो धार बाकि नहीं....................

Saturday, June 11, 2016

ख्वाब

इस ज़मीं ने उन बादमानों ने,
रात के उजालों में छलकते दर्द के पैमानों ने,
मेरा हँसी ख्वाब ज़ब्त किया है,
उन होश के कद्रदान हुस्न वालों ने.

Saturday, June 4, 2016

रंजिशें

ख्यालों की रंजिशें कुछ ऐसी हैं,
जो दिल में है वो ज़ुबां पर नहीं. 

Tuesday, April 26, 2016

वाकिया


एक खुसनसीब सा वाकिया, एक बदनसीब सा ग़म 
वहां मुस्कुरा रही थी ज़िंदगी यहाँ तन्हां  खड़े थे हम

Saturday, August 11, 2012

आंसूं

जिन आँखों का खुद कोई ना माज़ी ना सानी साहिब,
उन आँखों से बरसे हैं, यूँ हीं, आंसूं बन कर............

Friday, July 27, 2012

याद - ए - ग़म

मैं तुम्हें कैसे अकेला छोड़ दूँ मेरे हमदम???
ख़ुदा जाने कोण बड़ा है??
मेरी मोहोब्बत, या तेरी याद - ए - ग़म.