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Kahkashan
Tuesday, September 27, 2016
धार
बड़े बेबस हैं, नतीजों के दीदार पे,
जाने कौन कह गया की हम में अब वो धार बाकि नहीं....................
Saturday, June 11, 2016
ख्वाब
इस ज़मीं ने उन बादमानों ने,
रात के उजालों में छलकते दर्द के पैमानों ने,
मेरा हँसी ख्वाब ज़ब्त किया है,
उन होश के कद्रदान हुस्न वालों ने.
Saturday, June 4, 2016
रंजिशें
ख्यालों की रंजिशें कुछ ऐसी हैं,
जो दिल में है वो ज़ुबां पर नहीं.
Tuesday, April 26, 2016
वाकिया
एक खुसनसीब सा वाकिया, एक बदनसीब सा ग़म
वहां मुस्कुरा रही थी ज़िंदगी यहाँ तन्हां खड़े थे हम
Saturday, August 11, 2012
आंसूं
जिन आँखों का खुद कोई ना माज़ी ना सानी साहिब,
उन आँखों से बरसे हैं, यूँ हीं, आंसूं बन कर............
Friday, July 27, 2012
याद - ए - ग़म
मैं तुम्हें कैसे अकेला छोड़ दूँ मेरे हमदम???
ख़ुदा जाने कोण बड़ा है??
मेरी मोहोब्बत, या तेरी याद - ए - ग़म.
Friday, November 21, 2008
जिंदगी
बेचारगी लाचारगी, यह जिंदगी बर्बाद है.
दर्द जुते, ग़म पड़े, परेशानियों की खाद है,
क्यूँ जिंदगी नाराज़ है ?
बन रहा, बिगड़ रहा, हालातों से झगड़ रहा,
पर यह नसीब क्यूँ नाराज़ है?
मौत है, जशन है, आधा उढा क्यूँ कफन है ??
मौत हो, पूरी हो, जिंदगी से इतनी सी फरियाद है.
साथ हों, पास हों, ना आइने नाराज़ हों , अधुरा सा यह एक ख्वाब है.
अन्नू
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